Thursday, January 14, 2010

आशाएं...

अपना मुकाम हासिल किया


लेकिन अपनी आशाओं को पिछे छोड़ दिया

वो बारिश की बुँदे दिखायीं नहीं देती

वो जगमगाते तारें कहीं खो गए

मकान को घर बनाना बाक़ी है

अपने आप के लिए जीना अभी बाक़ी है

गुजरे हुए पल लौट के आयेंगे

इस आशा को आगे बढ़ाना है

एक एहसास छुपा है मन में,

खुद को एक सितारा बनाना है

जो सिर्फ अपने मन की सुने

ओर जीने की सचायीं को जाने.